सम्राट विक्रमादित्य
उज्जैन (अवंतिका) भारत के प्राचीन और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण नगरों में से एक है। प्राचीन समय में यह अवंति महाजनपद की प्रमुख राजधानी था। उज्जैन का संबंध व्यापार, शिक्षा, ज्योतिष, साहित्य और धर्म से रहा है। विक्रमादित्य की कथाओं के कारण भी उज्जैन को भारतीय लोक-स्मृति में विशेष स्थान मिला।
विक्रमादित्य भारतीय परंपरा में उज्जैन के महान, न्यायप्रिय और विद्वान राजा के रूप में प्रसिद्ध हैं। उनके नाम से विक्रम संवत जुड़ा हुआ है, जिसका प्रारंभ परंपरागत रूप से 57 ईसा पूर्व माना जाता है, उनके दरबार के नवरत्नों की कथा भी प्रसिद्ध है, जिनमें कालिदास और वराहमिहिर जैसे विद्वानों के नाम आते हैं।
उज्जैन की लोकपरंपरा में विक्रमादित्य को महाकाल का परम भक्त माना जाता है। कई कथाओं में बताया जाता है कि वे महाकाल की उपासना करते थे और भगवान शिव की कृपा से उन्हें शक्ति और संरक्षण प्राप्त था। विक्रमादित्य नाम भारतीय परंपरा में एक आदर्श, न्यायप्रिय और विद्वान राजा के रूप में प्रसिद्ध है। उन्हें प्रायः उज्जैन से जोड़ा जाता है। उनके नाम से जुड़ी विक्रम संवत परंपरा भी अत्यंत प्रसिद्ध है, जिसका आरंभ 57 ईसा पूर्व से माना जाता है।
लोककथाओं में विक्रमादित्य को अत्यंत साहसी, न्यायप्रिय, दानी और विद्वानों का संरक्षक बताया गया है। बेताल पच्चीसी और सिंहासन बत्तीसी जैसी प्रसिद्ध कथाओं में भी उनका वर्णन मिलता है।
विक्रमादित्य के नौ रत्न
परंपरा के अनुसार उनके दरबार में नौ महान विद्वान थे, जिन्हें “नवरत्न” कहा जाता था…
1. कालिदास — महान कवि और नाटककार
कालिदास संस्कृत साहित्य के सबसे प्रसिद्ध कवियों में माने जाते हैं। उनकी प्रमुख रचनाएँ अभिज्ञानशाकुंतलम्, मेघदूत, रघुवंश और कुमारसंभव हैं। उनकी रचनाओं में प्रकृति, प्रेम और मानवीय भावनाओं का सुंदर वर्णन मिलता है।
2. धन्वंतरि — आयुर्वेदाचार्य
धन्वंतरि को भारतीय परंपरा में आयुर्वेद और चिकित्सा का महान आचार्य माना जाता है। उनका नाम स्वास्थ्य, औषधि और चिकित्सा-विज्ञान से विशेष रूप से जुड़ा है। आयुर्वेद में उन्हें बहुत सम्मान प्राप्त है।
3. अमरसिंह — कोशकार और विद्वान
अमरसिंह संस्कृत के प्रसिद्ध विद्वान थे। उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना अमरकोश है। यह संस्कृत का प्रसिद्ध पर्यायवाची शब्दकोश है और भारतीय भाषाशास्त्र में इसका महत्वपूर्ण स्थान है।
4. वराहमिहिर — ज्योतिषी और खगोलविद
वराहमिहिर प्राचीन भारत के प्रसिद्ध खगोलविद और ज्योतिषाचार्य थे। उनकी प्रसिद्ध कृति बृहत्संहिता है, जिसमें खगोल, ज्योतिष, मौसम, वास्तु और प्राकृतिक घटनाओं सहित अनेक विषयों की जानकारी मिलती है।
5. वररुचि — व्याकरणाचार्य
वररुचि का नाम संस्कृत व्याकरण और भाषाशास्त्र से जुड़ा है। परंपरा में उन्हें अत्यंत विद्वान और भाषाओं के ज्ञाता के रूप में वर्णित किया गया है।
6. क्षपणक — दार्शनिक एवं विद्वान
क्षपणक को नवरत्नों में एक दार्शनिक और धार्मिक विद्वान माना जाता है। उनके जीवन और रचनाओं के बारे में अन्य नवरत्नों की तुलना में बहुत कम प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध है।
7. घटकर्पर — कवि
घटकर्पर संस्कृत के कवि माने जाते हैं। उनसे घटकर्पर काव्य नामक रचना को जोड़ा जाता है। उनके काव्य में संस्कृत की साहित्यिक शैली और अलंकारों का प्रयोग देखने को मिलता है।
8. शंकु — वास्तु एवं भूगोल के विद्वान
शंकु को परंपरा में वास्तु, भूगोल और मापन-विज्ञान से संबंधित विद्वान माना जाता है। उनके बारे में ऐतिहासिक जानकारी बहुत सीमित है, इसलिए उनके योगदान के बारे में सावधानी से बात की जाती है।
9. वेतालभट्ट — विद्वान और नीतिज्ञ
वेतालभट्ट को नवरत्नों में नीति, धर्म और शास्त्रों के विद्वान के रूप में बताया जाता है। उनके जीवन के बारे में प्रमाणिक ऐतिहासिक जानकारी सीमित है और उनके नाम से जुड़ी कई बातें परंपरागत स्रोतों में मिलती हैं।

नौ महान विद्वान नवरत्न
कालिदास → साहित्य
धन्वंतरि → चिकित्सा
अमरसिंह → शब्दकोश
वराहमिहिर → ज्योतिष/खगोल
वररुचि → व्याकरण
क्षपणक → दर्शन
घटकर्पर → काव्य
शंकु → वास्तु/भूगोल
वेतालभट्ट → नीति/शास्त्र

उज्जैन का संबंध व्यापार, शिक्षा, ज्योतिष, साहित्य और धर्म से रहा है। ईस कारण भी उज्जैन को भारतीय लोक-स्मृति में विशेष स्थान मिला। विक्रमादित्य भारतीय परंपरा में उज्जैन के महान, न्यायप्रिय और विद्वान राजा के रूप में प्रसिद्ध हैं।